दर्शन एजुकेशन फाउंडेशन ने होलिस्टिक एजूकेशन के 30 गौरवशाली वर्ष पूरे किए

नई दिल्ली : शिक्षा, खेल और अध्यात्म के क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्तियां एक यादगार शाम को खास अवसर पर एकत्रित हुईं, जब भारत के प्रमुख शिक्षा संस्थानों में से एक, दर्शन एजुकेशन फाउंडेशन (DEF) ने 8 अक्टूबर, 2025 बुधवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम, प्रगति मैदान में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन कर अपनी 30वीं वर्षगांठ मनाई। यह भव्य शाम शिक्षा के क्षेत्र में सबसे ऊँचा मुकाम पाने और सांस्कृतिक वैभव के जीवंत संगम के रूप में उभरी, जिसने DEF की तीन दशकों की प्रभावशाली यात्रा का जश्न मनाया।

भारत की विरासत, संस्कृति और प्रगतिशील दृष्टिकोण का प्रतीक यह मनोरम स्थल, हम सभी के सामने एक आदर्श पृष्ठभूमि प्रदान करता है क्योंकि विश्व की कई प्रतिष्ठित हस्तियां भविष्य की पीढ़ी को आकार देने वाले सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक - शिक्षा पर चिंतन करने के लिए एक साथ आईं।

पर्ल जुबली समारोह की अध्यक्षता क्म्थ् के संस्थापक अध्यक्ष और विश्व-प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने की। उनके साथ भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु केन्द्रीय मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव, भारत की पहली महिला पैरालंपिक पदक विजेता पद्मश्री दीपा मलिक, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के उप कुलपति पद्मश्री प्रो. डॉ. महेश वर्मा, दिल्ली टेक्नीकल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर श्री प्रतीक शर्मा और सी.एस.आई.आर. के मुख्य वैज्ञानिक और एन.ए.बी.एल. के चैयरमेन श्री आर.के. कोटलाना आदि शामिल थे।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत गीत के साथ हुई, जिसके बाद संत राजिन्दर सिंह जी महाराज के साथ इन सभी गणमान्य व्यक्तियों ने पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्जवलित कर पर्ल जुबली समारोह का विधिवत उद्घाटन किया।  

DEF की 30वीं वर्षगांठ के विषय, “शांति से शक्तिः जीवन को प्रकाशित करना” पर बोलते हुए, संत राजिंदर सिंह जी महाराज ने भावी पीढ़ियों को आकार देने में होलिस्टिक एजूकेशन की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। 3,000 से अधिक उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, पूर्व वैज्ञानिक और आध्यात्मिक गुरु संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कहा कि 30 साल पहले हमने दर्शन एकेडमी की शुरूआत शिक्षा में श्रेष्ठता के अलावा अध्यात्म द्वारा अंतर की शक्ति को जागृत करना से की थी। आज हम ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहां विभिन्न क्षेत्रों की पृष्ठभूमि और संस्कृति के लोग हमारे संपर्क में आते हैं, जिससे कि हम तनाव और चिंता से भर जाते हैं। हम अपने बच्चों को किस तरीके से शांति के साथ इन चुनौतियों से व्यवहार करना सिखाएं? 

उन्होंने आगे कहा कि आमतौर पर हम ताकत को शारीरिक शक्ति के साथ जोड़ते हैं जबकि सच्ची ताकत हमारे अंतर स्थिरता में है। विश्वभर में हो रही रिसर्च से हमें पता चलता है कि ध्यान-अभ्यास और शांत अवस्था में बैठने से हम अपनी अंदरूनी ताकत को बढा सकते हैं क्योंकि आंतरिक स्थिरता में ही सच्चे मायनों में ताकत होती है। हमारे भीतर शांति और खुशी के खज़ाने हैं, जो हमें अंतर से प्रसन्न रखते हुए शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तकलीफों को दूर करने में हमारी मदद करते हैं। इससे हमारी एकाग्रता में बढ़ोतरी होती है और हम अपने कार्य क्षेत्रों में अधिक से अधिक सफलता प्राप्त करते हुए हम सदा-सदा की खुशी और आनंद का जीवन जीते हैं।

अंत में संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कहा कि दिन की शुरूआत में दर्शन एकेडमी स्कूलों में सभी विद्यार्थियों को ध्यान-अभ्यास पर बिठाया जाता है, ताकि वे अपने अंदर स्थिरता को अनुभव करते हुए शांति को प्राप्त करें। जिससे कि हमारा संपूर्ण वातावरण प्रेम, खुशी और शांति में बदल जाए। यही दर्शन एजूकेशन फाउंडेशन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य है। 

विशिष्ट अतिथियों ने पिछले 30 वर्षों में मूल्य-आधारित शिक्षा प्रदान करने में दर्शन एजूकेशन फाउंडेशन के अनुकरणीय प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने इस बारे में अपने विचार साझा किए कि कैसे एक मजबूत शिक्षा प्रणाली आज की दुनिया में बदलाव का माध्यम बन सकती है।

श्री भूपेन्द्र यादव ने अपने संदेश में कहा कि आज संत राजिन्दर सिंह जी महाराजं अध्यात्म की शिक्षा को संपूर्ण विश्वं में फैला रहे हैं जो कि युवाओं को सही रास्ते पर चलने में मददगार है और वे वर्तमान शिक्षा प्रणाली को सही दिशा देते हुए विकसित भारत के संकल्प को अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। 

पदमश्री दीपा मलिक ने अपने प्ररेणादायक करियर के अनेक उदाहरण साझा किए और इस बात पर जोर दिया कि कैसे शांतिमय जीवन जीने से हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने में मदद मिलती है।

चुनौतियों, दृढ़ता और सफलता से भरपूर अपनी मार्मिक जीवन गाथा के माध्यम से, 2016 रियो पैरालिंपिक पदक विजेता दीपा मलिक ने कहा कि “शिक्षा और मानवता के लिए संत राजिन्दर सिंह जी महाराज का योगदान अमूल्य है।”

अपने अनुभव बताते हुए उन्होंने कहा कि एक पैरा-एथलीट के रूप में, जिसने जीवन भर चुनौतियों का सामना किया, आंतरिक शांति की ओर मुड़ने से मुझे संघर्षों और अंधकार पर विजय पाने में मदद मिली। जब मुझे विकलांगता का पता चला, तो मैं घंटों अस्पताल में रही, और तब मैंने शांति के महत्व को समझा। मौन मेरा एक ऐसा सहारा बन गया जिसने मुझे अपने भीतर से जुड़ने में मदद की और आज दर्शन एजूकेशन फाउंडेशन मौन, शांति या ध्यान-अभ्यास के द्वारा इस खूबसूरत बदलाव में बढ़-चढ़कर अपना योगदान दे रहा है।”

प्रो. महेश वर्मा ने कहा कि, “आज की भाग-दौड़ भरी दुनिया में, शांति अक्सर पीछे छूट जाती है। हमने अपने लिए भौतिक सफलताएँ भले ही प्राप्त कर ली हों लेकिन फिर भी हम अपने भीतर अकेलापन महसूस करते हैं। यहीं पर दर्शन एजूकेशन फाउंडेशन की भूमिका भिन्न है, क्योंकि यह छात्रों में शांति और आनंद का संचार करता है।”

प्रो. श्री प्रतीक शर्मा ने कहा कि दर्शन एजूकेशन फाउंडेशन जैसे शिक्षा संस्थान अंदरूनी बदलाव के द्वारा विद्यार्थियों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद करते हैं। अंत में प्रसिद्ध वैज्ञानिक श्री कोटनाला ने अपने संदेश में कहा कि दर्शन एजूकेशन फाउंडेशन समाज में जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण की दिशा में महत्ववपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। 

इस अवसर पर, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने स्कूल पत्रिका, “दर्शनिका 2025” का विमोचन किया।

इस शाम का समापन दर्शन अकादमी, दिल्ली के विद्यार्थियों द्वारा एक सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसमें संगीतमय और शिक्षाप्रद नृत्य नाटिकाएं और DEF की प्ररेणादायक 30-वर्ष की यात्रा की सुन्दर झलकियाँ प्रस्तुत की गईं। समारोह का समापन धन्यवाद प्रस्ताव और एक समूह तस्वीर के साथ हुआ, जिसने शांति, एकता और आनंद की एक उत्साहवर्धक शाम को पेश किया।

संत राजिन्दर सिंह महाराज के मार्गदर्शन में, दर्शन एजुकेशन फाउंडेशन भारत और विदेशों में अपने 25 दर्शन अकादमी स्कूलों के माध्यम से होलिस्टिक एजूकेशन, शांतिपूर्ण शिक्षा और बच्चों के चहुंमुखी विकास की पहचान बना हुआ है।


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