स्टील और निर्माण क्षेत्र के विस्तार के साथ डीलर–डिस्ट्रिब्यूटर नेटवर्क पर केंद्रित होगा बिल्ड कनेक्ट 2026

# वित्त वर्ष 2025 में 50 मिलियन टन से बढ़कर 2030 तक लगभग 70 मिलियन टन होने का अनुमान: ट्रेड आधारित स्टील वितरण

नई दिल्ली | भारत का स्टील और निर्माण सामग्री क्षेत्र तेज़ी से विस्तार के चरण में प्रवेश कर रहा है। उत्पादन क्षमता में निरंतर वृद्धि और घरेलू मांग के स्थिर बने रहने से इस क्षेत्र को मजबूती मिल रही है। उद्योग आकलन के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत का स्टील उत्पादन 160 मिलियन टन को पार कर चुका है, जबकि 2030 तक स्थापित क्षमता के 300 मिलियन टन के स्तर तक पहुँचने की संभावना है।

 इसी तरह, बुनियादी ढाँचे और आवास क्षेत्र में लगातार बनी गति के चलते सीमेंट क्षमता में भी समानांतर विस्तार देखा जा रहा है।

जैसे-जैसे क्षमता विस्तार तेज़ हो रहा है, उद्योग का फोकस अब केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इस बढ़े हुए पैमाने को बाज़ार तक कितनी कुशलता से पहुँचाया जाए, इस पर भी केंद्रित हो रहा है।

उद्योग अनुमान बताते हैं कि वित्त वर्ष 2026 में भारत में तैयार स्टील की खपत लगभग 162 मिलियन टन रही, जिसमें से करीब 50 मिलियन टन स्टील ट्रेड आधारित चैनलों—जैसे डीलर, डिस्ट्रिब्यूटर, स्टॉकिस्ट और यार्ड—के माध्यम से वितरित हुआ। ये चैनल मुख्य रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम स्तर पर संचालित होते हैं। 2030 तक स्टील की मांग के लगभग 210 मिलियन टन तक पहुँचने का अनुमान है, जबकि ट्रेड आधारित वितरण के माध्यम से होने वाली आपूर्ति सालाना लगभग 70 मिलियन टन तक बढ़ सकती है। यह वृद्धि टियर 2 और टियर 3 बाज़ारों में गहरी पैठ, वैल्यू ऐडेड स्टील उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी और डीलर–डिस्ट्रिब्यूटर ढाँचे के क्रमिक आधुनिकीकरण से प्रेरित है।

इन रुझानों पर नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में आयोजित कर्टन रेज़र प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चर्चा की गई, जहाँ उद्योग से जुड़े हितधारकों ने औपचारिक रूप से बिल्ड कनेक्ट 2026 की घोषणा की। यह राष्ट्रीय स्तर का एक्सपो-कम-कॉन्फ्रेंस स्टील और निर्माण सामग्री क्षेत्र के डीलर–डिस्ट्रिब्यूटर इकोसिस्टम को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।

विकास के सक्षमकर्ता के रूप में वितरण

कर्टन रेज़र के दौरान हुई चर्चाओं में यह बात सामने आई कि जैसे-जैसे वॉल्यूम बढ़ते हैं और उत्पाद पोर्टफोलियो अधिक जटिल होते जाते हैं, वैसे-वैसे वितरण क्षमता, भौगोलिक पहुँच और परिचालन तैयारियाँ उद्योग की सतत वृद्धि के लिए अहम सक्षमकर्ता बनती जा रही हैं।

उद्योग आकलन के अनुसार, डीलर–डिस्ट्रिब्यूटर चैनल के माध्यम से हर वर्ष लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये मूल्य की स्टील और निर्माण सामग्री की बिक्री होती है। यह आँकड़ा संगठित वित्त तक बेहतर पहुँच, तरलता चक्रों में सुधार और स्मार्ट इन्वेंट्री प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित करता है, ताकि जोखिम प्रबंधन के साथ-साथ विकास को भी समर्थन दिया जा सके।

बिल्ड कनेक्ट 2026

बिल्ड कनेक्ट 2026 को एक ऐसे पहले राष्ट्रीय मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो देशभर के डीलर और डिस्ट्रिब्यूटर, मिल और निर्माता, ईपीसी कंपनियाँ, आर्किटेक्ट, वित्तीय संस्थान और तकनीकी सेवा प्रदाताओं को एक साथ जोड़ेगा। यह मंच अखिल भारतीय कनेक्टिविटी, क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा, साथ ही वैल्यू ऐडेड उत्पादों, डिजिटल टूल्स और संरचित वित्तीय समाधानों से जुड़ा परिचय भी प्रदान करेगा, जो बदलते ट्रेड इकोसिस्टम की ज़रूरतों के अनुरूप होंगे।

इस आयोजन में 300 से अधिक डिस्ट्रिब्यूटर और 3,000 से ज़्यादा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम स्तर के डीलरों की भागीदारी अपेक्षित है, जो भारत के ट्रेड आधारित वितरण नेटवर्क के व्यापक स्वरूप को दर्शाती है।

उद्योग की राय

प्रेस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता करते हुए अंबा शक्ति समूह के चेयरमैन कमल गोयल ने कहा कि जैसे-जैसे स्टील क्षमता बढ़ रही है और निर्माता अधिक वैल्यू ऐडेड उत्पाद पेश कर रहे हैं, वैसे-वैसे एक सक्षम और भविष्य के लिए तैयार वितरण नेटवर्क विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी बाज़ार अपनाने के लिए केंद्रीय भूमिका निभाता है।

बिल्ड कनेक्ट 2026 के आयोजक और उद्योग प्रतिनिधि सुमित अग्रवाल ने कहा कि भारत का बढ़ता उत्पादन आधार उद्योग के लिए यह अवसर प्रस्तुत करता है कि वह क्षमता विस्तार के साथ-साथ अपने वितरण ढाँचे को भी आधुनिक और सशक्त बनाए।

अखिल भारतीय लोहा व्यापार संघ के अध्यक्ष अमित गुप्ता ने कहा कि ऐसा राष्ट्रीय मंच सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम स्तर के डीलर और डिस्ट्रिब्यूटरों को व्यापक पहचान दिलाने, विभिन्न क्षेत्रों के साथियों से सीखने और उद्योग के अगले विकास चरण के लिए खुद को तैयार करने में मदद कर सकता है।

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