भक्ति की सुगंध बिखेरता महाराष्ट्र का 59वां निरंकारी संत समागम, उमड़ा लाखों का जनसमूह

 परमात्मा को जानकर हर पल उसके अहसास द्वारा आत्ममंथन संभव — निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज

सांगली, 25 जनवरी 2026: “परमात्मा सर्वव्यापी है, सृष्टि के कण-कण में विद्यमान है, उसे प्रत्यक्ष रूप से जानकर और हर क्षण उसके अहसास में जीवन जीने से ही आत्ममंथन की दिव्य आंतरिक यात्रा संभव हो पाती है।” ये प्रेरणादायक उद्गार निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने महाराष्ट्र के 59वें संत समागम के प्रथम दिवस, 24 जनवरी 2026 को उपस्थित लाखों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
सांगली के ईश्वरपुर रोड स्थित लगभग 350 एकड़ के विशाल मैदान में आयोजित इस तीन दिवसीय समागम में महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न प्रांतों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु भक्त एवं प्रभुप्रेमी सज्जन सम्मिलित हुए।
सतगुरु माता जी ने भक्ति के विषय में समझाते हुए कहा कि भक्ति स्वयं को सुधारने और संवारने का नाम है। मन को निर्मल बनाकर, जीवन को सुंदर बनाते हुए मानवता के मार्ग पर चलकर सहज जीवन जीना ही सच्ची है भक्ति है। संतों-महापुरुषों ने सदैव स्वयं को सुधारने की शिक्षा दी है, न कि दूसरों की कमियों को देखने की। विनम्रता, सहनशीलता जैसे दिव्य गुणों को अपनाकर अपने जीवन को उज्ज्वल बनाना चाहिए।
सतगुरु माता जी ने  फरमाया कि जब जीवन में ब्रह्मज्ञान का आलोक प्रकट होता है, तो भक्त दूसरों के दुःख-दर्द को महसूस करने लगता है। उसके हृदय में दया और करुणा का भाव उत्पन्न होता है। जैसे स्वयं के जीवन का कल्याण हुआ है, उसी प्रकार वह स्वभाव औरों के जीवन में भी ज्ञान की रोशनी प्रज्ज्वलित करने का प्रयास करता है। ऐसे संतजन स्वयं ज्ञानानुसार जीवन जीते हुए यह दिव्य संदेश उदारता एवं विनम्रता से समाज तक पहुंचाते रहते हैं।
अंत में सतगुरु माता जी ने कहा कि अध्यात्म में आत्ममंथन हृदय से सोचने-समझने का विषय है, यह केवल बुद्धि का विषय नहीं है। परमात्मा ने इस सुंदर संसार की रचना की है। यदि हम इस संसार में आए हैं, तो हमारे मन में उपस्थित नकारात्मक भावों को दूर करना, आंतरिक प्रदूषण को समाप्त करना तथा इंसानियत की भावना के साथ जीवन व्यतीत करना हमारा कर्तव्य है। साथ ही बाह्य प्रदूषण को दूर करना भी हमारी जिम्मेदारी है, ताकि इस सृष्टि की सुंदरता सदा बनी रहे।
सत्संग कार्यक्रम के दौरान देश-विदेश से आए मिशन के वक्ताओं ने विभिन्न भाषाओं में अपने-अपने विचार व्याख्यान, भक्ति रचनाओं, कविताओं एवं प्रस्तुतियों के माध्यम से व्यक्त किए। समागम समिति के समन्वयक आदरणीय नंदकुमार झांबरे ने भी इस आध्यात्मिक आयोजन के मुख्य उद्देश्य को रेखांकित करते हुए अपनी भावनाएं प्रकट कीं।
सेवादल रैली
समागम के दूसरे दिन का शुभारंभ एक भव्य एवं आकर्षक सेवादल रैली से हुआ। इसमें महाराष्ट्र एवं अन्य स्थानों से आए हजारों सेवादल भाई-बहनों ने अपनी-अपनी वर्दियों में सुसज्जित होकर भाग लिया। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के आगमन पर मिशन के सेवादल अधिकारियों द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर दिव्य युगल का हार्दिक स्वागत किया गया।
रैली का अवलोकन करने के उपरांत सतगुरु माता जी ने मिशन के शांति प्रतीक श्वेत ध्वज को फहराया। इस रैली में बैंड की धुन पर पी.टी. परेड, संगीतमय योग, मानव पिरामिड, मल्लखंभ, एरोबिक्स, एम्ब्रेला फॉर्मेशन सहित अनेक खेलकूद एवं साहसिक करतब प्रस्तुत किए गए।
साथ ही मिशन की शिक्षाओं पर आधारित विभिन्न भाषाओं में लघु नाटिकाएं प्रस्तुत की गईं, जिनके माध्यम से भक्ति में सेवा के महत्व, अहंकार-रहित जीवन, सेवा में चेतनता एवं आदर-भाव जैसे दिव्य गुणों को अपनाने की प्रेरणा दी गई।
सेवादल एवं श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए सतगुरु माता जी ने कहा कि जीवन में निराकार परमात्मा को प्राथमिकता देते हुए समर्पित भाव से सेवा करनी चाहिए। सेवा केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि पूरे दिल, श्रद्धा और सत्कार भाव से की जाने वाली साधना है। सेवा के साथ-साथ सत्संग को जीवन में महत्व देना भी सेवा का ही एक रूप है। सेवा के इस मूल भाव को समझकर किया गया कर्म ही जीवन को संवारता है।
निरंकारी मिशन के नव साहित्य का अनावरण
समागम के प्रथम दिवस सत्संग समारोह के दौरान सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के करकमलों द्वारा समागम विशेषांक “आत्म मंथन”, ‘गुरुदेव हरदेव’ पुस्तक के संशोधित संस्करण सहित मिशन की अनेक पुस्तकों के नवीन एवं संशोधित संस्करणों का विमोचन किया गया। ये सभी नव-प्रकाशित पुस्तकें एवं मिशन की पत्र-पत्रिकाएं समागम में लगे प्रकाशन स्टॉलों पर उपलब्ध हैं, जिनका लाभ श्रद्धालुगण उत्साहपूर्वक ले रहे हैं।
लंगर एवं कैंटीन व्यवस्था
समागम में पधारे सभी श्रद्धालुओं के लिए सामूहिक भोजन (लंगर) की व्यवस्था मैदान के तीनों भागों में की गई है। एक लंगर स्थल पर, एक समय में लगभग 10,000 श्रद्धालु भोजन ग्रहण कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त चार कैंटीनों की भी व्यवस्था की गई है, जहां अत्यंत रियायती दरों पर चाय, कॉफी, शीत पेय एवं अल्पाहार उपलब्ध हैं। कैंटीनों में मिनरल वाटर की भी समुचित व्यवस्था की गई है।



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